नामवर सिंह ने कल रात तकरीबन 11.50 बजे आखिरी सांस ली। 92 साल की उम्र में छोड़ा साथ, करीब एक महीने से दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर में नामवर सिंह ब्रेन हैमरेज की वजह से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे।नामवर सिंह हिंदी साहित्य जगत का मशहुर सम्मानित नाम हैं। उन्होंने आलोचना और साक्षात्कार विधा को नई दिशा दी है। नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई 1927 को जीयनपुर (अब चंदौली) वाराणसी में हुआ था। उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान से भी नवाजा गया है।नामवर सिंह ने साहित्य में काशी विश्वविद्यालय से एमए और पीएचडी की। उसके बाद इसी विश्वविद्यालय में पढ़ाने का कार्य भी किया। काफी लंबे समय तक एक प्रोफेसर के जगह रह कर सेवाएं दी। उनकी छायावाद, नामवर सिंह और समीक्षा, आलोचना और विचारधारा जैसी किताबें काफी लोकप्रिय रही थी।बता दें कि नामवर सिंह जी का वाराणसी जिले (अब चंदौली) के जीयनपुर नामक गांव के रहने वाले थे। उनका जन्म 28 जुलाई, 1926 को हुआ था। उन्होंने 1941 में कविता से लेखक जीवन का आरम्भ किया था। उनकी पहली कविता 1941 में ‘क्षत्रियमित्र’ पत्रिका (बनारस) में प्रकाशित हुई थी, जो बहुत लोकप्रिय रही थी।आलोचना में उनकी किताबें पृथ्वीराज रासो की भाषा, इतिहास और आलोचना, कहानी नई कहानी, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परंपरा की खोज, वाद विवाद संवाद आदि मशहूर है। उनका साक्षात्कार ‘कहना न होगा’ भी साहित्य जगत में मशहूर रही थी।साथ ही उन्होंने ने सागर विश्वविद्यालय में भी अध्यापन का काम किया, लेकिन सबसे लंबे समय तक उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्याल में काम किया था। इसके बाद रिटायर होने पर वे एमिरिटेस प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाना शुरु कर दिया था ।नामवर सिंह के व्यक्तित्व की यही खूबी है। हर खूबी के कुछ फायदे होते हैं तो कुछ नुकसान भी होते है। अपनी इन खूबी के लिए उन्हें काफू नुकसान भी उठाने पडे थे। नामवरजी को बनारस में काफी विरोध झेलना पड़ा, हालांकि यह विरोध तुलसी और आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने भी झेला था।https://www.abstarnews.com/2019/02/20/%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE/


হ্যালো বন্ধুরা, আমি আপনাকে অনেক অনেক স্বাগত জানাই। আমার নাম আয়ুশি এবং আমি দিল্লি থেকে এসেছি এবং আজ আমি আপনাকে আমার সত্য গল্পটি বলতে যাচ্ছি যা আপনারা সকলের জানা উচিত। শুরু থেকে শুরু করা যাক।আমি মডেল হতে চেয়েছিলাম এবং ছোটবেলা থেকেই মডেলিংয়ের প্রতি আমার আগ্রহ আছে। ছোটবেলা থেকেই অর্গানজা কাপড় পরা নিয়ে আমার খুব আগ্রহ ছিল। আমি যখনই কোথাও থেকে বাইরে যাই লোকেরা আমাকে উপরে থেকে নীচে দেখতে পায়। কিছু লোক এমনকি ছোট বাচ্চারা আমাকে আমার বাড়িতে অনুসরণ করে। আমার বয়স 21 বছর এবং আমি অভিনয় ক্ষেত্রে পড়াশোনা শেষ করেছি।দীর্ঘদিন ধরে বুঝতে পারি না কীভাবে অভিনয়ের জন্য আবেদন করব?
আর কার সাথে কথা বলব, তার পরে আমার মনোযোগ আমার এক বন্ধু অজয়ের দিকে গেল, যিনি মিডিয়া ক্ষেত্রে কাজ করছিলেন, এবং চলচ্চিত্র পরিচালক এবং নায়কদের সাথে তাঁর ভাল পরিচয় ছিল।কিছু দিন পরে, আমি ফেসবুকে অজয়ের সাথে কথা বলতে শুরু করি এবং তারপরে আমরা দুজনেই একে অপরের সাথে খুব বেশি পেতে শুরু করি। আমি তাকে জড়িয়ে দিয়ে তার বয়ফ্রেন্ড হতে চেয়েছিলাম, যাতে আমি তাকে আমার ক্যারিয়ারের জন্য ব্যবহার করতে পারি এবং এজন্য আমি প্রতিটি ধরণের মূল্য দিতে প্রস্তুত ছিলাম।একদিন আমি অজয়কে একটি পার্টিতে যেতে ডেকেছিলাম, অজয় ঠিক দশটায় পার্টিতে পৌঁছেছিল। আমি পার্টিতে ইতিমধ্যে অজয়ের জন্য অপেক্ষা করছিলাম, এবং অজয়কে নিয়ন্ত্রণ করতে কিছু প্রদাহজনক অঙ্গ পরতে হয়েছিল। অজয় এবং আমি খুব মজা করেছি এবং রাত সাড়ে বারোটা নাগাদ একসাথে নাচলাম এবং এই সময়ে আমি অজয়কে মদ খেয়েছি। এখন আমি অজয়কে বাড়িতে চলতে বললাম এবং আমরা অজয়ের গাড়িতে বাড়ির দিকে রওনা হয়েছি।source: http://www.benglahotstory.com/%e0%a6%af%e0%a7%8c%e0%a6%a8-%e0%a6%97%e0%a6%b2%e0%a7%8d%e0%a6%aa/%e0%a6%9a%e0%a7%81%e0%a6%a6-%e0%a6%8f%e0%a6%b8%e0%a7%87%e0%a6%9b%e0%a6%bf%e0%a6%b2%e0%a7%87%e0%a6%a8-%e0%a6%a8%e0%a6%be%e0%a6%af%e0%a6%bc%e0%a6%bf%e0%a6%95%e0%a6%be-%e0%a6%b9%e0%a6%af%e0%a6%bc/


கர்ப்பகாலம் முழுவதும் கர்ப்பிணி பெண்கள் சாப்பிட வேண்டிய உணவு முறைகள் என்று இருந்தாலும் இதிலும் ஒவ்வொரு மாதமும், ஒவ்வொரு ட்ரைமெஸ்டரிலும் எடுத்துகொள்ள வேண்டிய உணவுகளை தனியாக பிரிக்கலாம்.
முழுமையாக தெரிந்து கொள்ள கிளிக் செய்யவும்: கர்ப்பிணி பெண்கள் சாப்பிட வேண்டிய உணவு வகைகள்





