सत्यनारायण भगवान की कथा लोक में प्रचलित है। हिंदू धर्मावलम्बियों के बीच सबसे प्रतिष्ठित व्रत कथा के रूप में भगवान विष्णु के सत्य स्वरूप की सत्यनारायण व्रत कथा है। कुछ लोग मनौती पूरी होने पर, कुछ अन्य नियमित रूप से इस कथा का आयोजन करते हैं। सत्यनारायण व्रत कथा (Satyanarayan Katha PDF Hindi) के दो भाग हैं, व्रत-पूजा एवं कथा। सत्यनारायण व्रत कथा स्कंदपुराण के रेवाखंड (रेवाखण्ड) से संकलित की गई है। सत्य को नारायण (विष्णु के रूप में पूजना ही सत्यनारायण की पूजा है। इसका दूसरा अर्थ यह है कि संसार में एकमात्र नारायण ही सत्य हैं, बाकी सब माया है।श्रीव्यास जी ने कहा – एक समय नैमिषारण्य तीर्थ में शौनक आदि सभी ऋषियों तथा मुनियों ने पुराणशास्त्र के वेत्ता श्रीसूत जी महाराज से पूछा – महामुने! किस व्रत अथवा तपस्या से मनोवांछित फल प्राप्त होता है, उसे हम सब सुनना चाहते हैं, आप कहें। श्री सूतजी बोले – इसी प्रकार देवर्षि नारदजी के द्वारा भी पूछे जाने पर भगवान कमलापति ने उनसे जैसा कहा था, उसे कह रहा हूं, आप लोग सावधान होकर सुनें। एक समय योगी नारदजी लोगों के कल्याण की कामना से विविध लोकों में भ्रमण करते हुए मृत्युलोक में आये और यहां उन्होंने अपने कर्मफल के अनुसार नाना योनियों में उत्पन्न सभी प्राणियों को अनेक प्रकार के क्लेश दुख भोगते हुए देखा तथा ‘किस उपाय से इनके दुखों का सुनिश्चित रूप से नाश हो सकता है’, ऐसा मन में विचार करके वे विष्णुलोक गये। वहां चार भुजाओं वाले शंख, चक्र, गदा, पद्म तथा वनमाला से विभूषित शुक्लवर्ण भगवान श्री नारायण का दर्शन कर उन देवाधिदेव की वे स्तुति करने लगे। नारद जी बोले – हे वाणी और मन से परे स्वरूप वाले, अनन्तशक्तिसम्पन्न, आदि-मध्य और अन्त से रहित, निर्गुण और सकल कल्याणमय गुणगणों से सम्पन्न, स्थावर-जंगमात्मक निखिल सृष्टिप्रपंच के कारणभूत तथा भक्तों की पीड़ा नष्ट करने वाले परमात्मन! आपको नमस्कार है।. सत्यनारायण कथा | Satyanarayan Vrat Katha PDF Hindi
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भगवान विष्णु की कृपाइस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।3. मानसिक शांतिव्रत और पूजा करने से मन शांत और सकारात्मक बनता है।Devi Anjali ji के अनुसार, एकादशी व्रत आध्यात्मिक उन्नति का एक महत्वपूर्ण साधन है।Ekadashi Vrat Puja Vidhiयदि आप पहली बार एकादशी व्रत कर रहे हैं तो नीचे दी गई पूजा विधि का पालन करें।1. एकादशी कथा पढ़ेंएकादशी व्रत की कथा पढ़ना या सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।Ekadashi Vrat Rules (व्रत के नियम)एकादशी व्रत करते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।दशमी से सात्विक भोजन करेंएकादशी के दिन अनाज का सेवन न करेंब्रह्मचर्य का पालन करेंभगवान विष्णु का ध्यान और भजन करेंद्वादशी के दिन व्रत का पारण करेंइन नियमों का पालन करने से व्रत पूर्ण फल देता है।Ekadashi Vrat Mein Kya Khayeएकादशी के दिन फलाहार किया जा सकता है।अनुमति वाले खाद्य पदार्थ:फलदूधदहीमखानासाबूदानाकुट्टू का आटासिंघाड़े का आटाआलूEkadashi Vrat Mein Kya Nahi Khana Chahiyeएकादशी के दिन कुछ चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।चावलगेहूंदालमांसाहारप्याज और लहसुनशराब या नशाEkadashi Vrat Ke Pramukh Prakarसाल भर में लगभग 24 एकादशी आती हैं।कुछ प्रमुख एकादशी हैं:निर्जला एकादशीदेवशयनी एकादशीदेवउठनी एकादशीमोक्षदा एकादशीपापमोचनी एकादशीपुत्रदा एकादशीहर एकादशी का अपना अलग महत्व और कथा होती है।Ekadashi Vrat Ke Benefitsएकादशी व्रत करने से कई लाभ मिलते हैं।आध्यात्मिक लाभयह व्रत व्यक्ति को भगवान के करीब लाता है।मानसिक लाभमन शांत और सकारात्मक बनता है।स्वास्थ्य लाभउपवास शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।धार्मिक लाभपापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।Devi Anjali ji के अनुसार, एकादशी व्रत श्रद्धा और भक्ति से करने पर जीवन में सुख और समृद्धि आती है।Conclusionएकादशी व्रत हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली व्रत है। यह केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि का एक मार्ग भी है।यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ एकादशी व्रत करता है तो उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति आती है।धार्मिक मार्गदर्शन के अनुसार Devi Anjali ji बताती हैं कि एकादशी व्रत व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता लाने का एक श्रेष्ठ माध्यम है।FAQ – Ekadashi Vrat Kathaएकादशी व्रत किस भगवान का होता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना जाता है।Source UR:- https://devianjaliji. com/ekadashi-vrat-katha-complete-story-puja-vidhi-vrat-mahatva
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Rangbhari Ekadashi 2022: भारत एक ऐसा देश है जहां पर भिन्न भिन्न प्रकार के व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी मनाई जाती है। कुछ छेत्रों में इसे आमलकी एकादशी/Amalaki Ekadashi भी कहते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह एक मात्र ऐसी एकादशी है, जिसका सीधा संबंध भगवान शिव/Lord Shiva से होता है।इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में होती है। इस दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती के साथ नगर भ्रमण करते हैं और पूरी नगरी लाल गुलाल से रंग में रंग जाती है। इस दिन भोलेनाथ का स्वरुप देखकर हर शिव भक्त आनंदित हो उठते हैं। आइए जानते हैं रंगभरी एकादशी/Rangbhari Ekadashi की तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व।रंगभरी एकादशी तिथि एवं मुहूर्तपंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 13 मार्च दिन रविवार को सुबह 10 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 14 मार्च दिन सोमवार को दोपहर 12 बजकर 05 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, रंगभरी एकादशी 14 मार्च को मनाई जाएगी।इस दिन एक खास बात और है, और वह यह है कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग/Swarth siddhi yoga बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 06 बजकर 32 मिनट से प्रारंभ होगा, जो रात 10 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। रंगभरी एकादशी को पुष्य नक्षत्र रात 10 बजकर 08 मिनट तक होगा।रंगभरी एकादशी का महत्व | Importance of Rangbhari Ekadashiरंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव पहली बार माता पार्वती को अपनी नगरी काशी में लेकर आए थे। कहा जाता है कि बाबा विश्वनाथ माता गौरा का गौना कराकर पहली बार काशी/Kashi लाए थे, तब उनका स्वागत रंग, गुलाल से हुआ था। इस वजह से हर साल काशी में रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ और माता गौरा का धूमधाम से गौना कराया जाता है।इस दिन आप भी भगवान शिव और मां गौरी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो इस दिन करें भगवान शिव की पूजा और पढ़ें एकादशी व्रत कथा/Ekadashi Vrat Katha. Source URL: https://sites. google. com/view/vinaybajrangis/blog/rangbhari-ekadashi-2022
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